करवा चौथ 2026
भारत में करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को है। तिथि की सटीक अवधि, आपके शहर में सूर्योदय और व्रत खोलने वाला चंद्रोदय, मिनट तक की गणना के साथ।
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विवाहित महिलाएँ अपने पति के कल्याण के लिए सूर्योदय से लेकर चंद्र के उदय होने तक दिन भर का व्रत रखती हैं; व्रत चंद्र को देखने के बाद खोला जाता है, प्रायः छलनी के ज़रिए, और उन्हें जल अर्पित किया जाता है।
- भारत में तारीख़
- गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
- तिथि
- कार्तिक कृष्ण चतुर्थी
- तिथि आरंभ
- 29 अक्टूबर, 01:07 IST
- तिथि समाप्त
- 29 अक्टूबर, 22:11 IST
शहर अनुसार
प्रत्येक शहर अपने स्थानीय समय के अनुसार। भारत के बाहर पर्व की गणना आपके अपने सूर्योदय से होती है, इसलिए इसकी तारीख़ भारत से एक दिन अलग हो सकती है।
| शहर | तारीख़ | सूर्योदय (व्रत आरंभ) | चंद्रोदय (व्रत समाप्त) |
|---|---|---|---|
| नई दिल्ली | उसी दिन | 06:30 | 20:11 |
| मुंबई | उसी दिन | 06:37 | 20:55 |
| कोलकाता | उसी दिन | 05:39 | 19:42 |
| चेन्नई | उसी दिन | 06:01 | 20:39 |
| बेंगलुरु | उसी दिन | 06:12 | 20:50 |
| हैदराबाद | उसी दिन | 06:13 | 20:36 |
| पुणे | उसी दिन | 06:32 | 20:53 |
| अहमदाबाद | उसी दिन | 06:42 | 20:47 |
| जयपुर | उसी दिन | 06:34 | 20:22 |
| लखनऊ | उसी दिन | 06:13 | 20:01 |
| चंडीगढ़ | उसी दिन | 06:35 | 20:07 |
| पटना | उसी दिन | 05:55 | 19:47 |
| भोपाल | उसी दिन | 06:23 | 20:26 |
| इंदौर | उसी दिन | 06:29 | 20:34 |
| वाराणसी | उसी दिन | 06:03 | 19:57 |
| देहरादून | उसी दिन | 06:29 | 20:03 |
| अमृतसर | उसी दिन | 06:43 | 20:12 |
| नागपुर | उसी दिन | 06:14 | 20:24 |
| लंदन | उसी दिन | 06:48 | 18:22 |
| न्यू यॉर्क | उसी दिन | 07:22 | 20:31 |
| टोरंटो | उसी दिन | 07:49 | 20:40 |
| दुबई | उसी दिन | 06:24 | 20:23 |
| सिंगापुर | उसी दिन | 06:46 | 21:57 |
| सिडनी | उसी दिन | 05:58 | 23:08 |
अपनी कुंडली से दिन को देखें
किसी शहर में पंचांग सभी के लिए एक जैसा होता है। आपकी कुंडली बताती है कि आपके अपने चंद्र और आपकी अपनी दशाओं के अनुसार इनमें से कौन-से घंटे और दिन आपके अनुकूल हैं।
यह कैसे निकाला जाता है
दिन वही है जो इस पर्व के लिए शास्त्रीय नियम बताते हैं — सूर्योदय के समय की तिथि, या दिन का वह समय जब उसकी पूजा का विधान है (गोधूलि वेला में लक्ष्मी पूजा)। उस दिन प्रत्येक शहर के लिए समय की गणना, मिनट तक, निरयण राशि चक्र (लाहिड़ी) में की जाती है। सूर्यास्त के बाद रात्रि के पंद्रह मुहूर्तों में से पहले तीन मुहूर्त प्रदोष काल कहलाते हैं; लक्ष्मी पूजा की अवधि वह है जहाँ यह स्थिर वृषभ लग्न से मिलती है। पंचांग की यह अवधि चिंतन और साधना के लिए है — किसी फल का निश्चित आश्वासन नहीं।